राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन

संदर्भ 

  • केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 में प्रस्तावित संशोधनों का प्रारूप प्रकाशित किया है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 का उद्देश्य ग्रामीण जनसंख्या के 75% तथा शहरी जनसंख्या के 50% तक की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति करना है, जो जनगणना 2011 के अनुसार लगभग 81.35 करोड़ व्यक्तियों के बराबर है।
  • इसका उद्देश्य लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के माध्यम से रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराकर खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • पात्र परिवारों को निम्नलिखित आधार पर रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है—
    • अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार: ये परिवार समाज के अत्यंत गरीब वर्ग से संबंधित होते हैं।
      • प्रत्येक AAY परिवार को प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान किया जाता है।
    • प्राथमिकता परिवार (PHH): प्रत्येक पात्र व्यक्ति को प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान किया जाता है।

लाभार्थी कौन हैं?

  • अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार: इनका चयन राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया जाता है। यह योजना समाज के सबसे गरीब एवं वंचित परिवारों को कवर करती है।
    • पात्र श्रेणियाँ : ऐसे परिवार जिनका मुखिया विधवा, असाध्य रोग से पीड़ित, दिव्यांग अथवा 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का वृद्ध हो तथा जिनके पास आजीविका का सुनिश्चित साधन या सामाजिक सहयोग उपलब्ध न हो।
      • ऐसी विधवा, असाध्य रोगी, दिव्यांग व्यक्ति, 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति, अविवाहित महिला अथवा अविवाहित पुरुष, जिनके पास परिवार, सामाजिक सहयोग अथवा आजीविका का कोई सुनिश्चित साधन न हो।
      • सभी आदिम जनजातीय (PTGs) परिवार।
      • भूमिहीन कृषि श्रमिक, सीमांत किसान, ग्रामीण कारीगर/शिल्पकार, झुग्गी-झोपड़ी निवासी, असंगठित क्षेत्र में दैनिक मजदूरी करने वाले व्यक्ति तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के अन्य समान वर्ग।
      • एचआईवी (HIV) से संक्रमित सभी पात्र गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवार।
  • प्राथमिकता परिवार (PHH): इनका चयन राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा अपने-अपने निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया जाता है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के साथ विलय 

  • वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) प्रारम्भ की, जिसके अंतर्गत अतिरिक्त खाद्यान्न निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।
  • जनवरी 2023 से सरकार ने PMGKAY का NFSA में विलय कर दिया तथा NFSA के अंतर्गत मिलने वाले नियमित खाद्यान्न को भी पूर्णतः निःशुल्क कर दिया।
  • नवंबर 2023 में इस निःशुल्क खाद्यान्न योजना को पाँच वर्ष (जनवरी 2024 से दिसंबर 2028 तक) के लिए बढ़ा दिया गया।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में प्रस्तावित संशोधन 

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 3 में एक नया प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसके अनुसार अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रति माह 7 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान किया जाएगा, बशर्ते कि प्रति परिवार अधिकतम 35 किलोग्राम की सीमा लागू रहे।
    • पूर्व में प्रत्येक AAY परिवार को परिवार के सदस्यों की संख्या की परवाह किए बिना 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह प्रदान किया जाता था।
  • AAY राशन कार्डधारकों को यह खाद्यान्न पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
  • प्रस्ताव का औचित्य: इस संशोधन का उद्देश्य खाद्यान्न आवंटन को अधिक तर्कसंगत बनाना है।
  • वर्तमान व्यवस्था में छोटे परिवारों को प्रति व्यक्ति अपेक्षाकृत अधिक तथा बड़े परिवारों को कम खाद्यान्न प्राप्त होता है।
  • प्रस्तावित संशोधन इस असंतुलन को दूर करने का प्रयास करता है।

प्रमुख चिंताएँ

  • अपर्याप्त पोषण सुरक्षा : प्रस्तावित संशोधन केवल अनाज तक सीमित है।
    • इसमें दालें, खाद्य तेल अथवा अन्य पोषक खाद्य पदार्थों को शामिल नहीं किया गया है।
  • अधिक खाद्यान्न की मांग : ‘राइट टू फूड’ अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से अत्यंत गरीब परिवारों के लिए 7 किलोग्राम के स्थान पर 14 किलोग्राम प्रति व्यक्ति खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है।
  • बड़े परिवारों के साथ असमानता: संशोधन में प्रति परिवार 35 किलोग्राम की अधिकतम सीमा यथावत रखी गई है।
    • परिणामस्वरूप बड़े परिवारों को अभी भी प्रति व्यक्ति अपेक्षित मात्रा से कम खाद्यान्न प्राप्त होगा।
  • क्षेत्रीय असमानताएँ: दक्षिणी राज्यों में अपेक्षाकृत छोटे परिवार अधिक संख्या में पाए जाते हैं।
    • प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत ऐसे परिवारों को वर्तमान प्रणाली की तुलना में कम खाद्यान्न प्राप्त हो सकता है।
  • पुराना लाभार्थी कवरेज: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत लाभार्थियों का कवरेज अभी भी जनगणना 2011 के आँकड़ों पर आधारित है।
    • जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद लाखों पात्र परिवार अभी भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के दायरे से बाहर हैं।
  • कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ: प्रस्तावित संशोधन सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित परिचालन समस्याओं का समाधान नहीं करता।
    • बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की विफलता, ई-केवाईसी (e-KYC) से संबंधित बहिष्करण, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्याएँ तथा प्रवासी श्रमिकों, वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयाँ आज भी पात्र लाभार्थियों को उनके खाद्यान्न अधिकार प्राप्त करने से वंचित करती हैं।

आगे की राह 

  • नवीनतम जनगणना के आधार पर लाभार्थी कवरेज का अद्यतन: वर्तमान जनसांख्यिकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों का कवरेज नवीनतम जनगणना के आधार पर संशोधित किया जाना चाहिए।
  • वर्तमान लाभार्थियों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना: संशोधन लागू करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी वर्तमान लाभार्थी की खाद्य सुरक्षा प्रभावित न हो।
  • पोषण सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण: केवल अनाज के स्थान पर दालें, खाद्य तेल एवं फोर्टिफाइड (पोषण-संवर्धित) खाद्य पदार्थों को भी योजना में सम्मिलित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
  • राज्यों के साथ व्यापक परामर्श: संशोधन को अंतिम रूप देने से पूर्व राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर सहमति बनाई जानी चाहिए, जिससे सहकारी संघवादको और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

Source: DTE, TH, PIB 

 

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